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किसी भी फसल के उत्पादन के लिए बीज एक महंगा आदान होता है| फसल उत्पादन की कुल लागत का लगभग २०-३० प्रतिशत भाग अकेले बीज पर ही खर्च हो जाता है| अतः स्वस्थ फसल प्राप्त करने के लिए हमें बीजों को बिमारियों से दूर रखना चाहिए जिसके लिए हमें फसलों को बोने से पहले बीजोपचार करना चाहिए| बीजोपचार का उद्देश्य न केवल बीज एवं मृदा जनित बिमारियों की रोकथाम करना होता है वरण जीवित परन्तु सुषुप्त जीवाणुओं के लेप करने के लिए ऐसे माध्यम का प्रयोग करना होता है

जो बीज अंकुरण के पश्चात अंकुरित पौधे को एक स्वस्थ एवं ओजपूर्ण विकसित पौधे के लिए नाइट्रोजन एवं स्फुर प्रदान करता है जिससे अच्छा उत्पादन प्राप्त होता है | फसलों को बीज जनित एवं मृदा जनित रोगों से बचाने के लिए बीजों को बोने से पहले कुछ रासायनिक दवाओं एवं पोषक तत्वों की उपलब्धता बढाने के लिए  कुछ जैव उर्वरकों से उपचारित किया जाता है | जैव उर्वरक के प्रकार –

नाइट्रोजन के लिए –

  • राइजोबियम फलीदार फसलों के लिए उपयोग किया जाता है |
  • एजेटोबेक्टर / एजोस्पैरीलम बिना फलीदार फसलों के लिए उपयोग किया जाता है |
  • नील हरित काई और एजोला पानी वाले खेत में धान  की फसल के लिए |

फास्फोरस के लिए –

  • फास्फोरस घोलक जीवाणु (पी.एस.बी. ) का उपयोग सभी फसलों के लिए एवं  राइजोबियम, एजेटोबेक्टर व एजोस्पायरीलम के साथ किया जा सकता है |

बीजोपचार के फायदे

  • फसल की बीज एवं मृदा जनित रोगों एवं किटों से बचाव
  • बीजों का अच्छा एवं एक सामान अंकुरण
  • दलहनी फसलों की जड़ों में नोड्यूलेसन को बढ़ता है |
  • प्रतिकूल परिस्थितियों (कम/ अधिक नमी ) में भी एक सामान फसल |
  • मृदा एवं पत्तियों में अनुप्रयोग से बेहतर |

बीज उपचार की विधि

बीज ड्रेसिंग

इस विधि में बीज को या तो सूखे मिश्रण से उपचारित किया जाता है या फिर लुगदी अथवा तरल घोल से गिले रूप में उपचारित किया जाता है | बीजों के उपचार हेतु बीज उपचार ड्रम का उपयोग किया जाता है | ड्रम के अन्दर निर्धारित मात्रा में बीज एवं दवा की मात्रा लेकर ड्रम का ढक्कन बंद करके १०-१५ मिनट तक घुमाएँ जब बीज की सतह पर दवा की परत दिखाई दे तब बीजोपचार की प्रक्रिया पूरी हो जाती है|

कम लगत में बीजोपचार करने के लिए मिट्टी के बर्तन अथवा पोलीथिन का भी उपयोग किया जा सकता है मिटटी के बर्तन में दवा और बीज निर्धारित मात्रा में लेकर बर्तन का मुंह बंद करके उसे अच्छी तरह हिलाकर बीजोपचार किया जा सकता है | पोलीथिन शीट पर बीजों एवं रसायन को फैलाकर किसानों द्वारा यांत्रिक रूप से मिलाया जा सकता है |

बीज कोटिंग

इस विधि  में बीज पर दवा को अच्छे से चिपकाने के लिए दवा के मिश्रण के साथ विशेष प्रकार के बाइंडर का उपयोग किया जाता है | कोटिंग के लिए उधोगों द्वारा उन्नत प्रकार की प्रौधोगिकी की आवश्यकता होती है |

बीजोपचार करते समय सावधानियां –

  • बीजों को पहले फफूंद नाशक दवा से उपचारित चाहिए उसके पश्चात् जैविक कल्चर से उपचार करना चाहिए |
  • उपचारित बीज को तुरंत बोने हेतु उपयोग करना चाहिए |
  • यदि बोने के बाद उपचारित बीज की मात्रा बच जाए तो उसे न तो जानवरों को खिलाना चाहिए न ही खुद खाना चाहिए |
  • दवा के खली डिब्बे या पैकेट नष्ट कर देना चाहिए |

कुछ फसलों के लिए बीजोपचार की शिफारिश नीचे दी गई है-

फसल

कीट/रोग

बीजउपचार

टिप्पणी    

गन्ना

रूट रॉट, विल्ट

कार्बेंडाज़िम (0.1%) 2 ग्राम/किलोग्राम बीज
ट्राइकोडर्मा  अनुपूरक 4-6 ग्राम/किलोग्राम बीज

बीज ड्रेसिंग के लिए मेटल बीज ड्रेसर/ मिट्टी के बर्तन या पॉलीथीन बैग का उपयोग किया जाता है

धान

रूट रॉट रोग

ट्राइकोडर्मा 5-10 ग्राम/किलोग्राम बीज (प्रत्यारोपण से पहले)

-उपर्युक्त के समान-

अन्य कीट/ जीव

क्लोरोपाइरिफॉस  3 ग्राम/किलोग्राम बीज

बैक्टीरियल शीथ ब्लाइट

स्यूडोमोनास फ्लॉरेसेंस  0.5% W.P. 10ग्राम/किलोग्राम।

रूट नॉट नेमाटोड

मोनोक्रिप्टोफॉस के 0.2% घोल में 6 घंटों तक बीज को सोखना

-उपर्युक्त के समान-

वाइट टिप निमेटोड

मोनोक्रिप्टोफॉस के 0.2% घोल में बीज को सोखना

-उपर्युक्त के समान-

 

अरहर

विल्ट, ब्लाईट एवं रूट रॉट    

ट्राइकोडर्मा  पूरक 4 ग्राम/किलोग्राम बीज की दर से

बीज की ड्रेसिंग के लिए धातु के बीज ड्रेसर/ मिट्टी के बर्तन या पॉलीथीन बैग का उपयोग किया जाता है।

गेहूं

दीमक 

 

 

बुवाई से पहले बीज का निम्नलिखित में से किसी भी कीटनाशक द्वारा उपचार करें।
i) क्लोरोपाइरिफॉस 4 मिली /किलोग्राम बीज की दर से या एन्डोसल्फान  7मिली /किलोग्राम बीज की दर से

बीज की ड्रेसिंग के लिए धातु के बीज ड्रेसर/ मिट्टी के बर्तन या पॉलीथीन बैग का उपयोग किया जाता है।

बँट/ फोल्स स्मट/ लूज़ स्मट/ कवर्ड स्मट

थिरम 75% WP
कार्बोक्सिन 75 % WP
टेबुकोनाजोल 2 DS 1.5 से 1.87 ग्राम ए.आइ. प्रति किलो बीज की दर से
टी.विरिडी  1.15 % WP 4 ग्राम/किलोग्राम की दर से

 

सूर्यमुखी

बीज रॉट

ट्राइकोडर्मा विरिडी 6 ग्राम/किलोग्राम बीज की दर से

-उपर्युक्त के समान-

 जैसिड व्हाईटफ्लाइ

एमिडाक्लोरपिड 48FS, 5-9 ग्राम ए.आइ. प्रति किलो बीज की दर से
एमिडाक्लोरपिड70WS, 7 ग्राम प्रति किलो बीज की दर से

 

जैसिड, एफिड, थ्रिप्स

एमिडाक्लोरपिड 70 WS 10 से 15 ग्राम ए.आइ./किलोग्राम बीज

 

मटर

रूट रॉट     

 

 

इनके द्वारा बीज उपचार
-   बैसिलससबटिलिस
-    स्यूडोमोनास फ्लोरेसेंस

100 किलोग्राम FYM में 2.5 – 5 किलोग्राम की दर से मिट्टी में अनुप्रयोग 
 या
-   कार्बेन्डाजिम या कैप्टेन२ ग्राम/किलोग्राम बीज 

-उपर्युक्त के समान-

वाईट रॉट

 थिरम+कार्बेन्डाजिम 2ग्राम/किलोग्राम बीज
कार्बेन्डाजिमया कैप्टेन 2ग्राम/किलोग्राम बीज

चना

विल्ट एवं डैम्पिंग ऑफ़

9ग्राम/ किलोग्रामबीज की दर से ट्राइकोडर्माविरीडी  1%WP  द्वारा बीज उपचार 
कार्बेन्डैजिम के साथ कार्बोसल्फान की मिश्रण - थिरम युक्त कार्बेन्डाजिम 0.2% की दर से,  कार्बोसल्फान के साथ 0.2% की दर से
15-30 मिली ए.आइ./किलोग्राम बीज की दर से बीज का कलोरपायरिफोस 20 EC द्वारा उपचार करें।

 

ज्वार

लूज़ स्मट
कवर्ड स्मट
लीफ स्ट्राइप
 
दीमक

कार्बोक्सिन 75% WP, 1.5 से 1.87 ग्राम ए.आई./किलोग्राम बीज की दर से थिरम 75%  WP

4 मिली/किलोग्राम बीज की दर से क्लोरपायरिफोसद्वारा बीज का उपचार करें।

 

भिन्डी

रूट नॉट नेमाटोड

पेसिलोमैसेसलिलेसिनस एवं स्यूडोमोनास फ्लोरेसेंस 10 ग्राम/किलोग्राम बीज ड्रेसर के रूप में

-उपर्युक्त के समान- 

मिर्च

एंथ्रेक्नोज़ पूरक    डैम्पिंग ऑफ

ट्राइकोडर्मा विरीडी   4 ग्राम/किलोग्राम, कार्बेन्डाजिम 1 ग्राम/100 ग्राम बीज की दर से बीज उपचार

-उपर्युक्त के समान-

 

मिट्टी में मौज़ूदगी द्वारा फफून्द रोग से संक्रमण

 

ट्राइकोडर्माविरीडी  2 ग्राम/किलोग्राम बीज की दर से तथा स्यूडोमोनास फ्लोरेसेंस, 10 ग्राम/किलोग्राम की दर से। कैप्टेन 75 WS 1.5 से 2.5 ग्राम ए.आइ./लिटर की दर से, मिट्टी को भिगोने के लिए

 

धनिया

विल्ट

ट्राइकोडर्मा विरीडी  4 ग्राम/किलोग्राम बीज की दर से

-उपर्युक्त के समान-

बैंगन

बैक्टीरियल विल्ट

स्यूडोमोनासफ्लोरेसेंस 10ग्राम/किलोग्राम की दर से

-उपर्युक्त के समान-

फलीदार सब्जियां

मिट्टी में मौज़ूदगी द्वारा संक्रमण 

ट्राइकोडर्माविरीडी  2 ग्राम/ 100 ग्राम बीज की दर से

-उपर्युक्त के समान-

 नेमाटोड

कार्बोफ्यूरान/ कार्बोसल्फान 3% (w/w)

क्रूसिफेरस सब्जियां
(पत्ता-गोभी, फूलगोभी, ब्रोकोली, नोल-खोल, मूली)

मिट्टी/ बीज से जनित रोग (डैम्पिंग ऑफ़) 

 

रूट नॉट नेमाटोड

2 ग्राम/ 100 ग्राम बीज की दर से ट्राइकोडर्माविरीडी  द्वारा बीज उपचार 
मिट्टी को भिगोने के लिए 
कैप्टेन 75% WS 1.5 से 2.5 ग्राम ए.आइ./लिटर की दर से

स्यूडोमोनासफ्लोरेसेंसएवंवर्लिसिलियम क्लैमिदोस्पोरियम10ग्राम/किलोग्रामबीजकीदर से,बीज ड्रेसर के रूप में।

 

-उपर्युक्त के समान-

आलू

मिट्टी और कंद जनित रोग

भंडारण से पहले 0.25% की दर से MEMC 3% WS  द्वारा  या 3% बोरिक एसिड द्वारा 20 मिनट के लिए बीज उपचार।

 

शिमला मिर्च

रूट नॉट नेमाटोड

स्यूडोमोनास फ्लोरोसेंस1% WP,पैसिलोमाइसिस लिलासिरिअस एवं वर्टिसिलिअम क्लैमिडोस्पोरिअम  1% WP @ 10 ग्राम/किलोग्राम बीज ड्रेसर के रूप में।

 

कुछ फसलों के लिए जैविक उर्वरकों द्वारा बीजोपचार की शिफारिश निचे दी गयी है –

फसल

जैविक उर्वरक

मात्रा (किलोग्राम/हे.)

प्रयोग विधि 

प्रयोग का समय

दाल वाली फसलें

अरहर, चना, मूंग, उड़द, मटर, मसूर

राइजोबियम

पी.एस.बी.

400-600 ग्रा.

1-2 किग्रा.

बीज उपचार

बीज उपचार

बोवाई के समय

बोवाई के समय

सोयाबीन, मूंगफली,

सेम

राइजोबियम

पी.एस.बी.

1-2 किग्रा.

1-2 किग्रा.

बीज उपचार

बोवाई के समय

चारा वाली फसलें

(बरसीम, ग्वार, मेथी)

राइजोबियम

पी.एस.बी.

1-2 किग्रा.

1-2 किग्रा.

बीज उपचार

 

बोवाई के समय

अनाज वाली फसलें

गेंहू,जौ,ज्वार, बाजरा,

मक्का, धान

एज़ेक्टोबैक्टर

पी.एस.बी.

एज़ेक्टोबैक्टर

1-2 किग्रा.

1-2 किग्रा.

2-3 किग्रा.

बीज उपचार

बीज उपचार

बीज उपचार

बोवाई के समय

बोवाई के समय

बोवाई के समय

तिलहन वाली फसलें

सरसों, तिल, सूर्यमुखी

एज़ेक्टोबैक्टर

एज़ेक्टोबैक्टर

पी.एस.बी.

200 ग्रा.

500-800 ग्रा.

1-2 किग्रा.

बीज उपचार

बीज उपचार

 

बोवाई के समय

बोवाई के समय

नकदी फसलें

कपास

जूट

गन्ना

तम्बाकू

 

एज़ेक्टोबैक्टर

एज़ेक्टोबैक्टर

एज़ेक्टोबैक्टर

एज़ेक्टोबैक्टर

पी.एस.बी.

 

600-1000 ग्रा.

800-1000 ग्रा.

4-5 किग्रा.

2-3 किग्रा.

1-2 किग्रा.

 

बीज उपचार

बीज उपचार

मृदा उपचार

पौध उपचार

 

बोवाई के समय

बोवाई के समय

पौध रोपण के समय

पौध रोपण के समय

 

सब्जियाँ

आलू

गोभी,टमाटर,प्याज

बैंगन,मिर्च, भिन्डी,मूली

गाजर, शलजम, परवल

 

एज़ेक्टोबैक्टर

एज़ेक्टोबैक्टर

एज़ेक्टोबैक्टर

एज़ेक्टोबैक्टर

पी.एस.बी.

 

4-5 किग्रा.

1.5-2.0 किग्रा.

400-400 ग्रा.

200 ग्रा.

1-2 किग्रा.

 

मृदा/कंद उपचार

पौध उपचार

बीज उपचार

बीज उपचार

 

 

बोवाई के समय

पौध रोपण के समय

बोवाई के समय

बोवाई के समय

 

उपरोक्त बीजोपचार के अलावा जैविक खेती में बीजोपचार के कुछ अग्रणी सूत्र निम्न प्रकार हैं

 

  • गर्म पानी से बीजोपचार – ५० से. ग्रे. तापक्रम पर २०-३० मिनट तक बीजों को डूबकर उपचार करना |
  • बीजामृत से  बीजोपचार – ५० ग्राम गौ गोबर, ५० मी.लि. गौ मूत्र, ५० मि. ली. गाय का दूध एवं २-३ ग्रा. चूना १ लीटर पानी में मिलकर रत भर रखने के बाद इसे बीजोपचार का लिए उपयोग करते हैं |
  • नमक के घोल से बीजोपचार – इस विधि से धान  के बीजों को उपचारित किया जाता है|

 बीजों को पहले नमक के १७ प्रतिशत घोल  (१.७०० किग्रा. प्रति १० लीटर पानी की दर से ) में डुबाते हैं इससे कमजोर एवं रोगजनित बीज तैरने लगते हैं उन्हें छानकर बाहर निकाल लिया जाता है बाकि बचे स्वस्थ बीजों को शुद्ध पानी से धोकर २४ घंटे साफ पानी में भिगाकर रखने के बाद बीजों को स्यूडोमोनास फ्लोरोसेन्से (५ ग्रा./ किग्रा. बीज)  एवं ट्राइकोडर्मा (५ ग्रा./ किग्रा. बीज) से उपचारित करें एवं बीजों की मोती तह बनाकर नाम स्थान पर ३६-४८ घंटे तक बोरियों से ढ़ककर रख दें | उसके बाद उन्हें उपयोग में ले |


Authors:

Mahendra Kumar Patel* and Chanchala Rani Patel

Department of Agriculture,

Raigarh (Chhattishgarh)

*Email: This email address is being protected from spambots. You need JavaScript enabled to view it.