Solar Power Drip Irrigation System - Best way to save energy & water

सौर ऊर्जा संचालित ड्रिप सिंचाई  प्रणाली - ऊर्जा और पानी की बचत करने के लिए सबसे उत्तम तरीका

Alok Gora

भारत एक कृषि प्रधान देश है हमारे देश की 60 प्रतिशत से अधिक आबादी कृषि गतिविधियों से जुडी हुई है। कृषि उत्पादन में निवेश के रूप में ऊर्जा की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। सामान्यतया: ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि कार्यों में पंप सेट को चलाने के लिए डिजल का उपयोग किया जाता है जो कि आज कल प्रतिदिन महंगा हो रहा है तथा उसके धुंए और ध्वनि से जैविक पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है । दूसरी ओर हम देंखे तो पायेंगे कि किसान अभी भी सिंचाई कि परम्परागत (बाढ़ सिचाई) विधियों का उपयोग कर रहे है जिससे पानी की  क्षति अधिक व सिंचाई  की दक्षता भी कम रहती है । आज हमारे देश की 22 प्रतिशत उर्जा (Non-Renewable Energy Consumption) एवं 80 प्रतिशत पानी का उपयोग अकेले कृषि क्षेत्र में होता है । हमारे देश में इस ऊर्जा एवं पानी के अपव्यय को रोकने की बहुत ज्यादा आवश्यकता  है । इन दोनों के अपव्यय को रोकने की सबसे अच्छी प्रणाली "सौर ऊर्जा संचालित ड्रिप सिंचाई प्रणाली" है । इस प्रणाली के प्रयोग से हम ऊर्जा के साथ-साथ पानी के अपव्यय  को भी कम कर सकते है ।

सौर ऊर्जा संचालित ड्रिप सिंचाई दो प्रणालियों, अर्थात सौर ऊर्जा चालित पंप और ड्रिप सिंचाई प्रणाली का मिलन है । सौर ऊर्जा संचालित पंप (Photovoltaic or PV) उन ग्रामीण क्षेत्रो में श्रम को कम करता है जहां पर बिजली की पहुँच नहीं है एवं जहां पानी महिलाओ और युवा लड़कियो द्वारा हाथो  से खीचा जाता है । दूसरी ओर ड्रिप सिंचाई सीधे पौधो की जड़ो को पानी (और उर्वरक ) देने के लिए अत्यंत कुशल तंत्र है । यह तंत्र पैदावार को बढ़ाता है और ऐसे क्षेत्रो में फसल और बगान  उगाने में मदद करता है जो पूर्णतया बारिश पर निर्भर होते है । इस प्रणाली को चित्र -1 द्वारा समझाया गया है । जिसमे पंप को सौर पैनल (PV Array) के द्वारा शक्ति मिलती है जो पानी के टैंक को भरने में मदद करता है । पानी का टैंक कुछ ऊचाई पर रखा होना चाहिए, ताकि गुरुत्वाकर्षण बल के कारण पानी कम दाब पर भी ड्रिप सिंचाई प्रणाली तक पहुँच सके । पंप, टैंक एवं खेतो के क्षेत्रफल का निर्धारण पानी की उपलब्धता और क्षेत्र के लिए अनुमानित वाष्पन-उत्सर्जन (Evapotranspiration)  की जरूरतों के आधार पर किया जाता है ।

Solar drip irrigation system चित्र 1: सौर ऊर्जा संचालित ड्रिप सिंचाई प्रणाली की व्यवस्था

(Source: http://www.stanford.edu/group/solarbenin/solarirrigation.html)

सौर ऊर्जा संचालित ड्रिप सिंचाई प्रणाली के मुख्य घटक (Solar water pumping system configurations):

सौर पैंनल (PV Array): इनमे अर्धचालक (Semiconductor) लगे होते है जिससे फोटोवोल्टिक प्रभाव  (Photovoltaic effect) उत्पन्न करके प्रकाश ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित किया जाता है । एक सौर पैंनल बहुत सारी छोटी-छोटी सौर कोशिकाओ (Solar cells) से मिल कर बना होता है । वर्तमान में सौर पैनल के लिए मोनोक्रिस्टेलाइन सिलिकॉन (Monocrystalline silicon), पॉलीक्रिस्टेलाइन (Polycrystalline silicon), अमॉर्फस सिलिकॉन (Amorphous silicon )एवं केडमियम टेलुराइड (Cadmium telluride) आदि का प्रयोग किया जाता है 

तालिका 1: सौर पैंनल के प्रकार और उनकी क्षमता

सौर पैंनल के प्रकार

क्षमता  रेंज

टिप्पणी

मोनोक्रिस्टेलाइन (Monocrystalline)

14 to 16%

उच्चतम मूल्य, तापमान से प्रभावित

 

पॉलीक्रिस्टेलाइन (Polycrystalline)

12 to 14%

मध्यम कीमत, तापमान से प्रभावित

 

अमॉर्फस (Amorphous Silicon)

8 to 9%

तापमान से प्रभावित नहीं है

 (Source: Research Institute for Sustainable Energy (rise), Murdoch, Western Australia)

1. माउन्टिंग संरचना (Mounting Structure):

सौर पैनल को हम दो प्रकार से लगा सकते है या तो एक निश्चित संरचना (Fixed structure) पर या एक ट्रैकिंग संरचना (Tracking structure) पर । निश्चित संरचना वाले कम महंगे तथा उच्च वेग वाली वायु को भी सहन कर लेते है । दूसरी ओर ट्रैकिंग संरचना थोड़ी महंगी होती है परन्तु इसमें सौर पैनल को आसानी से सूरज की दिशा में कर सकते है । यह संरचना निश्चित संरचना की तुलना में 25 प्रतिशत ज्यादा पानी देती है ।

2. पंप (Pump):

सौर ऊर्जा से चलाने के लिए विशेष पंप का उपयोग किया जाता है जो कि डी सी (Direct current) से चलता है । यह पंप बहुत दक्षता वाले होते है व इनकी कीमत भी ए सी (Alternate current) से चलने वाले पंप से अधिक होती है । डी सी पंप तीन प्रकार के होते है  विस्थापन (Displacement), केन्द्रप्रसारक (Centrifugal) व पनडुब्बी (Submersible)।

3. टैंक (Tank):

इस प्रणाली में टैंक पानी भण्डारण के लिए उपयोग में लेते है । टैंक की भंडारण क्षमता कम से कम इतनी होनी चाहिए कि वह तीन दिन तक पानी की मांग की आपूर्ति कर सके । ऐसा इसलिए करते है क्योकि रात के समय और बदलो के दिनों में सूरज नहीं होने के कारण यह प्रणाली काम नहीं कर सकेगी ।

ड्रिप सिंचाई प्रणाली (Drip Irrigation):

ड्रिप सिंचाई किसानो को कम  पानी वाले क्षेत्रो में फसल पैदा करने का सबसे कुशल तरीका प्रदान करती है । इस प्रणाली में पानी मेन लाइन (Mainlines), सब मेन लाइन (Sub-main lines) व लेटरल लाइन (Lateral lines) के नेटवर्क द्वारा होता हुआ पौधे  तक पहुंचता है । प्रत्येक ड्रिपर  द्वारा  पानी , पोषक तत्वों एवं अन्य आवश्यक विकास पदार्थो की नियंत्रित मात्रा पौधो की जड़ो तक पहुंचता है । पानी एवं पोषक तत्व ड्रिपर से मिट्टी में प्रवेश कर गुरुत्वाकर्षण बल के माध्यम से पौधो की जड़ क्षेत्र में पहुंचते है जिससे पौधो के जड़ क्षेत्र में पानी एवं पोषक तत्वो की कमी न हो पाए ।

चित्र 2: ड्रिप सिंचाई प्रणाली की व्यवस्था

(Source: http://www.jains.com)

डिजाईन एंड स्थापित प्रणाली (Design and installation system)

फसलो में लगने वाले पानी की दर  फसल के साथ-साथ भूमि  के  अनुसार भी बदलती है । एक ही फसल के लिए देश के विभिन्न भागो में  पानी की अवश्यकता अलग-अलग हो सकती है । ये पानी की मात्रा मिट्टी के प्रकार, खेती करने की विधि , वर्षा के पानी एवं जलवायु पर निर्भर करती है । सामान्यतया: भारत में 300 स्पष्ट धुप दिन होते है इसलिए किसानो को हम सौर ऊर्जा संचालित प्रणाली का उपयोग करने के लिए प्रेरित कर सकते है । इस प्रणाली तो स्थापित करने के लिए एक कुशल डिजाइनर की जरुरत है । प्रणाली स्थापित करने से पहले कुशल डिजाइनर किसानो से निम्नलिखित विवरण जानना चाहेगा :

  • फसलो का विवरण (कौनसी फसल किसान खेत में बौने वाला है ) ।
  • बुवाई के लिए कितना क्षेत्र उपलब्ध है जिसकी मदद से ड्रिप प्रणाली की डिजाईन की जा सके ।
  • सिंचाई में लगने वाले पानी की मात्रा ।
  • फसलो को कब सिंचाई के लिए पानी देना है ओर कब नहीं ।
  • जिस स्थान पर प्रणाली स्थापित करनी है वहाँ पानी का स्त्रोत क्या है (केनाल, तालाब, कुआँ या भू-गर्भ पानी)।
  • पानी की उपलब्धता लीटर प्रति मिनट ।
  • पानी की गुणवत्ता की जानकारी जिससे कि पंप को नुकसान न हो ।

सौर ऊर्जा संचालित ड्रिप सिंचाई  प्रणाली के लाभ (Advantage of solar drip irrigation system)

  • पानी निश्चित मात्रा में पौधो की जड़ो में दिया जाता है जिससे पानी का अपव्यय कम होता है ।
  • यह प्रणाली 50 प्रतिशत से अधिक पानी की  बचत करती है ।
  • यह प्रणाली प्रदूषण से मुक्त है ।
  • यह प्रणाली सौर ऊर्जा चालित है जो की आसानी से उपलब्ध है । बस प्रारंभ में निवेश की अवश्यकता है ।
  • इस प्रणाली में रखरखाव की लागत बहुत कम है ।
  • इसको बहुत कम पर्यवेक्षण की अवश्यकता है ।

सौर ऊर्जा संचालित ड्रिप सिंचाई प्रणाली किसानो के लिए एक बहुत ही श्रेष्ठ विकल्प है जो 50 प्रतिशत से अधिक पानी की बचत करता है व साथ ही अक्षय ऊर्जा का भी उपयोग करता है । यह प्रणाली दूरदराज गाँवों के लिए बहुत उपयोगी व धुप वाले दिनों के दौरान सबसे प्रभावी है । यह प्रौद्योगिकी किसान की आय बढ़ाती है एवं प्रदूषण से होने वाली बीमारियों के खर्चे को बचने में भी मदद करती है ।


Author:

Alok Gora

Assistant Professor

Department of Agricultural Engineering

C.P. College of Agriculture

SDAU, S.K. Nagar, Dantiwada-385506

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