Advanced India Campaign 2.0

उन्नत भारत अभियान मानव संसाधन विकास मंत्रालय की योजना है, जिसे 11 नवंबर, 2014 को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, दिल्ली द्वारा समन्वित किया गया है। उन्नत भारत अभियान का दूसरा संस्करण, उन्नत भारत अभियान 2.0 अप्रैल 2018 में लांच किया गया था।

इस योजना में 748 संस्थान भाग ले रहे हैं। दूसरे चरण के लिए 605 संस्थानों को ही चुना गया। इनमे से 313 संस्थान तकनीकी तथा 292 संस्थान गैर तकनीकी हैं। पहले चरण में 143 संस्थानों ने भाग लिया। जिसका उद्देश्य ग्रामीण संस्थानों, अनुसंधान को बढाना है।

उन्नत भारत अभियान क्या है?

उन्नत भारत अभियान (यूबीए) ग्रामीण उत्थान के लिए राष्ट्रीय मिशन है जो ग्रामीण विकास प्रक्रियाओं में परिवर्तनकारी परिवर्तनों के दष्टिकोण से प्रेरित है। उन्नत भारत अभियान के तहत ग्रामीण विकास के लिए उच्च शैक्षणिक संस्थाए, स्थानीय ग्रामीण समुदाय एवं लोगो को अच्छी पढाई का एवं कौशल विकास का मौका देके उनका विकास करना हैं।

इसके तहत गाँवो में रहने वाले लोग एवं उनके समुदायों को उच्च शिक्षण प्रदान किया जाएगा। शिक्षण के जरिए उन गाँवों में विकास किया जाएगा। उन्नत भारत अभियान को लागू करने का एक मात्र उद्देश्य ग्रामीण भारत को समृद्ध बनाना है।

इस अभियान में उच्च शिक्षण संस्थानों को कम से कम पांच गाँवों से जोड़ा जाएगा और ऐसे गांवो का आर्थिक एवं सामाजिक तौर पर विकास किया जाएगा। वह सभी हायर लर्निंग सस्थाए ग्राम्य क्षेत्रो के विकास कार्य में भाग लेंगी और यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण पहल है। यह अभियान समावेशी भारत के निर्माण के लिए ग्रामीण क्षेत्रो में परिवर्तनकारी विकास की प्रक्रिया के बदलाव से प्रेरित है। 

अवलोकन

उन्नत भारत अभियान संयुक्त भारत की वास्तुकला का निर्माण करने के लिए ज्ञान संस्थानों का लाभ उठाकर ग्रामीण विकास प्रक्रियाओं का दृष्टिकोण सुदृढ़ करना हैं।

मिशन

उन्नत भारत अभियान का उद्देश्य विकास में चुनौतियों की पहचान करना तथा स्थायी विकास में तेजी लाने के लिए उपलब्ध एवं उपयुक्त समाधानों को विकसित करना हैं जिसके लिए ग्रामीण भारत के लोगों के साथ काम करने के लिए उच्च शिक्षण संस्थानों को सक्षम करना है।

योजना के प्रमुख लक्ष्य

  • उच्च शिक्षा के संस्थानों और एक संस्थागत क्षमता और प्रशिक्षण के भीतर राष्ट्रीय आवश्यकताओं के लिए प्रासंगिक, विशेष रूप से ग्रामीण भारत के विकास के एजेंडे की समझ का निर्माण करना ।Ø  उच्च शिक्षा के आधार के रूप में सामाजिक कार्य के लिए जमीनी स्तर पर कार्य, हितधारकों से समन्वय और प्रोजेक्ट की आवश्यकता पर जोर देना।
  • ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं के समाधान के लिए नवीन तकनीकों का उपयोग करना।
  • ग्रामीण भारत और क्षेत्रीय एजेंसियों की उच्च शिक्षा संस्थानों के व्यावसायिक संसाधनों जैसे विज्ञान, तकनीक, उद्योग और प्रबंधन के क्षेत्र तक पहुंच बनानी हैं।Ø  अनुसंधान के परिणामों को बनाए रखने और अवशोषित करने के लिए नए व्यवसायों और प्रक्रियाओं को विकसित करना हैं।Ø  विज्ञान, समाज और पर्यावरण पर बड़े समुदाय के भीतर गरिमा की भावना विकसित करके सामूहिक भागीदारी को बढ़ावा देना हैं।
  • उच्च शिक्षण संस्थान के अध्यापकों व छात्रों को ग्रामीण क्षेत्रों की जानकारी एवं अनुभव प्रदान करना हैं।
  • सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए उच्च शिक्षण संस्थानों द्वारा योगदान देना।
  • यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में विकास प्रक्रिया को गति देने तथा मूलभूत परिवर्तन लाने के उद्देश्य से प्रेरित है। इसके तहत देश के बड़े शिक्षण संस्थानों के ज्ञान व साधनों का उपयोग किया जायेगा। इससे देश के सर्वांगीण विकास में गाँव भी भागीदार बन सकेंगे। इस योजना के तहत उच्च शिक्षण संस्थानों द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों के जीवन स्तर, समस्याओं व आवश्यकताओं के बारे में अध्ययन किये जायेगा तथा समस्याओं के समाधान के लिए उपाय भी सुझाए जायेंगे।

भारत में उन्नत भारत अभियान क्यों शुरू हुआ ?

भारत की 70% आबादी कृषि क्षेत्र में जुड़ी हुई है और ग्रामीण इलाकों में रहती है। कुल कार्यबल का 51% कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में कार्यरत है जो सकल घरेलू उत्पाद का केवल 17% हिस्सा है। इसके अलावा स्वास्थ्य, शिक्षा, आय, सार्वजनिक सेवाओं और परिसंपत्तियों की उपलब्धता में भारी अंतर होता है। उन्नत भारत अभियान इस समझ से शुरू किया गया था कि ग्रामीण विकास के बिना भारत न तो अपनी विकास क्षमता को बेहतर ढंग से हासिल कर सकता और न ही दुनिया के समक्ष ऐसे विकास को प्रस्तुत कर सकता हैं।

उन्नत भारत अभियान के उद्देश्य

ग्रामीण भारत की जरूरतों के लिए प्रासंगिक अनुसंधान और प्रशिक्षण में उच्च शिक्षण संस्थानों की संस्थागत क्षमता को विकसित किया जाएगा।

ग्रामीण भारत के लिए उन्नत भारत अभियान के क्या लाभ हैं?

  • उन्नत भारत अभियान के तहत, व्यवसायिक संस्थानों, गांवों की समस्याएँ एवं विकास की जरूरतों को पहचाना जाएगा। इन विकास चुनौतियों को उपयुक्त प्रौद्योगिकी के उपयोग से संबोधित किया जाएगा।
  • गांवों के विकास में तेजी लाने के लिए आर्थिक रूप से संभव समाधान विकसित किए जाएंगे। ये मिशन तकनीकी समुदायों को तकनीकी रूप से और स्थानीय रूप सशक्त करेगा जो आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देगा।
  • इसके अतिरिक्त, जमीनी स्तर पर संगठनों के उत्पाद और स्थानीय समाधानों के वितरण एवं विकास के लिए व्यावसायिक संसाधनों का समर्थन प्रदान किया जाएगा जो कि अप्रत्यक्ष रूप से ग्रामीणों के लिए आजीविका के अवसर पैदा करेगा।

हस्तक्षेप के प्रमुख क्षेत्र

  • मानव विकास
  • स्वास्थ्य
  • शिक्षा और संस्कृति
  • मान और धारणा विकास
  •  कौशल और उद्यमी

सामग्री (आर्थिक) विकास

  • जैविक कृषि और गाय आधारित अर्थव्यवस्था
  • जल प्रबंधन और संरक्षण
  • पुनःप्राप्य उर्जा स्रोत
  • कारीगर और ग्रामीण उद्योग
  • स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों का विकास और दोहन
  • साधारण सुविधाएं
  • ई-समर्थन (आईटी - सक्षम करना)

 Authors

1पवन कुमार, 2सतीश कुमार और  3अमित कुमार

 1विस्तार शिक्षा विभाग, चौ॰च॰सिं॰ह॰ कृषि विश्वविधालय, हिसार

2पादप रोग विभाग, चौ॰च॰सिं॰ह॰ कृषि विश्वविधालय, हिसार

3सस्य विज्ञान विभाग, चौ॰च॰सिं॰ह॰ कृषि विश्वविधालय, हिसार

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