Apiculture : Better way for increasing income in rural areas

शहद और इसके उत्पादों की बढती मांग के कारण मधुमक्खी पालन एक लाभदायक एवं आकर्षक व्यवसाय बनता जा रहा है। इसमे कम समय, कम लागत व कम पूंजी निवेश की जरूरत होती है। मधुमक्खी पालन फसलों के परागण में सहायक होकर फसलों की उत्पादकता में भी वृद्धि करता है। मधुमक्खी पालन व्यवसाय शुरू करने से पहले कम से कम एक वर्ष का योजना प्रारूप तैयार करना चाहिए।  

मधुमक्खी पालन व्यवसाय में आवश्यक सामग्री :

लकड़ी का बॉक्स, बॉक्स फ्रेम, जालीदार कवर, दस्तानें, चाकू, शहद रिमूविंग मशीन और ड्रम इत्यादि।

मधुमक्खियों का आवास :

मधुमक्खियों का घर यानि मधुमक्षिकागृह एक लकड़ी का बना बॉक्स/संदूक होता है, जिसमें दो खण्ड होते है। नीचे के तीन-चौथाई खण्ड को शिशु खण्ड कहते है क्योंकि इसमें रखे छते में अण्डे, शिशु  तथा स्वयं मक्खियों के लिए अशुद्ध शहद एवं पराग संचित रहता है। ऊपर के एक-चौथाई खण्ड में मधुमक्खिया शहद जमा करती है, इसे मधु कक्ष कहते है।

दोनो खण्डो के बीच एक जालीदार अवरोध रहता है, जिसमें से श्रमिक मधुमक्खिया तो एक खण्ड से दूसरे खण्ड में आ और जा सकती है परन्तु रानी मधुमक्खी नहीं। लकड़ी का यह बॉक्स चारों तरफ से बंद रहता है केवल नीचे के तल में एक छिद्र होता है, जिसमें से एक बार में केवल एक मधुमक्खी अंदर अथवा बाहर आ जा सकती है।

मधुमक्खियों का पोषण :

मधुमक्खियों को पोषण पराग व मकरंद द्वारा होता है, जो ये विभिन्न फूलों से प्राप्त करती है। फूल की बनावट, मकरंद संग्रहित करने की क्षमता, पेड़-पौंधो की आयु तथा फूल का स्थान कई अन्य कारक है जो मकरंद के निर्माण को प्रभावित करते है। ऋतु के अनुसार मधुमक्खियों को भोजन के लिए उपलब्ध पेड़-पौंधो की अलग उपयोगिता है।

आर्थिक, सामाजिक एवं पर्यावरण संतुलन के पेड़-पौंधे जैसे – शोभाकारी फूल, सब्जियॉ (टमाटर, बैंगन, मिर्च, लौकी, करेला, ककड़ी आदि) एवं फल (लीची, अमरूद, नींबू, पपीता आदि) सभी दलहनी एवं तिलहनी फसलें, बरसीम एवं रिजका जैसे पौष्टिक चारे, नीम, जामुन, सहजन, शहतूत, शीशम, ऑवला, रीठा, बहेड़ा, खैर, इमली, कचनार आदि व्यवसायिक एवं औषधीय पौधो से मधुमक्खियों को पराग व मकरंद प्रचुर मात्रा में मिल जाता है।

पराग व मकरंद प्राकृतिक रूप से पर्याप्त नही मिलने की स्थिति में मधुमक्खियों के लिए कृत्रिम भोजन की व्यवस्था की जाती है। कृत्रिम भोजन के रूप में एक पात्र में चीनी का घोल लेकर उसे मौनगृह में रख देते है। इसके अलावा मधुमक्खियों को कृत्रिम भोजन के रूप में असप्लिमेंट दिया जा सकता है। इसे बनाने के लिए लगभग 100 ग्राम साबुत उड़द अंकुरित करके पीस लिया जाता है। इस पीसी हुई दाल में दो चम्मच चीनी मिलाकर एक मिश्रण तैयार कर लेते है। यह मिश्रण मधुमक्खियों के लिए भोजन के रूप में प्रयोग में लिया जा सकता है।

मधुमक्खियों द्वारा मधु/शहद तैयार करना :

एक बॉक्स में कम से कम 5000 से 6000 मधुमक्खिया रखी जा सकती है, जिनमें से एक रानी मधुमक्खी, कुछ सैनिक तथा कुछ वर्कर होती है। रानी मधुमक्खी एक दिन में 1500 से 2000 अण्डे देती है। फूल आने के समय आम तौर पर जनवरी-फरवरी से अप्रैल-मई तक खेतों और बगीचों में बॉक्स रखे जाते है।

तीन किलोमीटर की रेंज तक मधुमक्खिया फूलों से पराग व मकरंद लाकर बक्से में भरती है। वर्कर मधुमक्खिया अपने पंखो से लाये रस को सुखाती है और शहद तैयार होता है। प्रोसेसिंग इकाई में शहद रिमूविंग मशीन के द्वारा छत्तों से शहद निकाल कर ड्रम में भर लिया जाता है।

मधुमक्खियों की सुरक्षा :

मधुमक्खी पालन व्यवसाय करने वाले को मधुमक्खियों के शत्रुओ के बारे में भी जानकारी होना आवश्यक है, ताकि वह इनकी रक्षा कर सकें। मौनगृह में पनपने वाले शत्रु मुख्य रूप से मोमी पतंगा, चींटीया, बर्र, डेगन फ्लाई, मकड़ी, माइट, बीटल और जूं इत्यादि है। इनके नियंत्रण के लिए निम्न उपाय किये जाने चाहिए -

  • शीत ऋतु के बाद जैसे ही गर्मी शुरू हो सभी मौनगृहों को खोल कर धूप लगाए और तलपटों को पूरी तरह साफ कर देंवे।
  • मोमी पतंगो से ग्रसित छत्तों को 60 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान वाले पानी में 4-5 घण्टे तक रखने से सुरंगो में पल रहे इस कीडे़ की इल्लियॉ मर जाती है।
  • प्रभावित छत्तों को आधा घण्टे तक धूप में रखें, जिससे इल्लियॉ बाहर निकल आयें। छत्तों को ठण्डाकर बॉक्स के अन्दर रख देंवे।
  • कीडे़ लगे छत्तों पर इथाइलिन ब्रोमाइड व काबर्न टेट्रा क्लोराइड के मिश्रण का छिड़काव करें।
  • निष्क्रिय मौसम में किसी कारणवश यदि मधुमक्खियों की संख्या कम हो जायें तो छत्तों की संख्या कम कर देंवे ताकि प्रत्येक छत्ता मधुमक्खियों से ढ़का रहे।

शहद का उपयोग :

  • शहद खाने से शरीर को ऊर्जा मिलती है।
  • शहद धमनियों में खून की सफाई करता है तथा गले के संक्रमण रोकने में भी लाभदायक है।
  • बच्चों को शहद देंने से उनकी याददाश्त बढ़ती है।
  • एक चम्मच शहद ताजे मक्खन के साथ लेने से बुखार नही होता।
  • खांसी, जुकाम, रक्तचाप, नेत्र विकार, पेट सम्बन्धी बिमारियों की दवाईयों एवं सौंदर्य प्रसाधनों में शहद का प्रयोग किया जाता है।

Authors:

विरेन्द्र कुमार1 और राजबाला चौधरी2

1कृषि अधिकारी, ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स

2विद्या वाचस्पति, श्री कर्ण नरेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय, जोबनेर जयपुर (राजस्थान)

Co-responding author’s E mail : This email address is being protected from spambots. You need JavaScript enabled to view it.

 

कृषि‍सेवा मे लेख भेजें

Submit article for publication